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Friday, June 28, 2013

Never Fall In Love With A Poet

Never Fall In Love With A Poet- By A Thomas Hawkins




Never fall in love with a poet
for their words are sometimes lies
on occasions they're a shield,
on occasions a disguise

They will take you on a journey
upon which they bare their soul
in a bid to ease your burden
in a bid to make you whole

But in every word they choose
for the stories that they tell
lies a little piece of heaven
and a little piece of hell

Tormented souls we poets are
sometimes quite broken and despaired
in search of lost expressions
missed by others who once cared

Never fall in love with a poet
unless you're prepared to share their pain
to hold them close on the darkest nights 
over and again

Below is my take on this poem,


एक कवि से प्यार मत करना,
इन झूठों का ऐतबार मत करना।

कभी शब्दों को ढाल बनाते हैं,
कभी शब्दों में ख़ुद को  छुपाते हैं,
इन्हें खोजने का विचार मत करना,
एक कवि से प्यार मत करना।

सपनों की दुनिया ये बनाते हैं,
आत्मा तक भी पहुँच जाते हैं,
कभी सब बोझ तेरे हर लेंगे,
कभी पूर्ण तुझे कर देंगे,
सपनों का इनके दीदार मत करना,
एक कवि से प्यार मत करना।

शब्दों से कथा बनाते हैं,
स्वर्ग-नर्क दिखलाते हैं,
टूटे,बिखरे,परेशान हों,पर खोए भावों को ढूँढ लाते हैं,
इनकी कथाएँ कभी साकार मत करना,एक कवि से प्यार मत करना।

इनके दर्द को गर न बाट सको,
अँधेरी रातों में इनको न थाम सको,
तो इनसे आँखे चार मत करना,
एक कवि से प्यार मत करना।

An attempt to make it more clear for you click here



Tuesday, October 16, 2012

Aik Aleef - Bulle Shah( with hindi translation)

एक अलिफ़ - बुल्ले शाह 

इलमन बस करियो यार 
एको अलिफ़ तेरे दरकार 
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार,
एक शब्द करे तेरा बेड़ा पार,

इल्म न आवे विच शुमार 
जांदी उम्र, नहीं ऐतबार 
इलमन बस करियो यार 
एको अलिफ़ तेरे दरकार 
ज्ञान न मिले चाहे पड़ो बार-बार,
कब तक जियोगे नहीं ऐतबार,

चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार,
एक शब्द करे तेरा बेड़ा पार।

इलमन बस करियो यार 
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार

पढ़-पढ़,लिख-लिख लांदे ढेर,
ढेर किताबें,चार छो फेर
करदे छनन विच उन्हेर 
पेछो:"रह?"ते खबर न सतर 
पढ़-पढ़ किताबें ढेर लगाया 
कुरान,हदीस सब पढ़ आया 
रोशनी में भी पर अँधेरा पाया
फिर भी उसको समझ न पाया 

इलमन बस करियो यार 
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार

पढ़-पढ़ शेख़ मशेख खावें
उलटे मसले घरों बता दें 
बे इल्मान नू लुट लुट खावें 
झूटे-सच्चे करें इकरार 
पढ़ कर मौलाना,शागिर्द बन जाओ 
सबको गलत तरीके बताओ 
न समझो से तुम पैसा खाओ 
करलो चाहे झूठे-सच्चे इकरार

इलमन बस करियो यार 
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार

पढ़ पढ़ नफल नमाज़ गुज़ारे 
अछीयां बाघा चंगा मारी 
मेंबर ते चढ़ वाज़ पुकारें 
कीत्ता तीनू इल्म खवार 
नमाजें पड़कर तुमने दिन गुज़ारे 
छत पर चढ़कर ख़ुदा का नाम भी पुकारे 
आसमान तक आवाज़ लगाई 
लालच से किया ज्ञान का प्रचार

इलमन बस करियो यार 
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार

जब मै सबक इश्क दा पड़िया 
दरिया देखे वहादत दा वाडिया  
घुमन घेरा दे विच उड़िया 
शाह इनायत लाया पार 
जिस दिन इश्क का पाठ पड़ा 
रहा उसकी नदी में डूबा पड़ा 
बेचैन हुआ कुछ समझ न पाया 
शाह इनायत ने किया मुझे पार 

इलमन बस करियो यार 
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार
एको अलिफ़ तेरे दरकार 
एक शब्द करे तेरा बेडा पार



Sunday, September 30, 2012

Dekh Kar Guzar Gaye

देख कर गुज़र गए ( Dekh Kar Guzar Gaye) (23/11/11)

वो मेरी तरफ देख कर गुज़र गए,
ना कुछ कहा ना बात की,
ना रुक के मुलाकात की,
डाल कर मुझपर बस एक नज़र गुज़र गए,
वो मेरी तरफ देख कर, देख कर गुज़र गए।

Woh meri taraf dekh kar guzar gaye,
Na kuch kaha na baat ki,
Na ruk ke mulaqat ki,
Daal kar mujhpar bas ek nazar chale gaye,
Woh mei taraf dekh kar, dekh kar guzar gaye.

सोचा की आवाज़ दूं,
किसी तरह तो रोक दूं,
लबों पर,पर लव्ज़ न आ सके,
और वोह मेरे हाल से युहीं बे खबर चले गए,
वो मेरी तरफ देख कर, देख कर गुज़र गए।

Socha ki awaaz doon,
Kisi tarah to rok doon,
Labon par,par lawz na aa sake,
Aur woh mere haal se yuhin be-khabar chale gaye,
Woh meri taraf dekh kar,dekh kar guzar gaye. 

रुक-रुक के जा रहे थे वो,
किसी चीज़ का जैसे इंतज़ार हो,
ज़ुल्फ़ की चादर से मुड़ कर भी देखा किये,
कोई इशारा मगर बिना किए निकल गए,
वो मेरी तरफ देख कर, देख कर गुज़र गए।

Ruk-Ruk ke jaa rahe the woh,
Kisi cheez ka jaise intezaar ho,
Zulf ki chadar se mud kar bhi dekha kiye,
Koi ishara magar bina kiye nikal gaye,
Woh meri taraf dekh kar,dekh kar guzar gaye.

फिर तो मिलना ही था,
ये दिल को एतबार था,
पहली नज़र का ये पहला प्यार था,
उम्र बिता दी वहीँ इंतज़ार इस कदर किए,
वो मेरी तरफ देख कर, देख कर गुज़र गए।

Phir to milna hi tha,
Ye dil ko aitbaar tha,
Pehli nazar ka ye pehla pyaar tha,
Umra bita di wahin intezaar is kadar kiye,
Woh meri taraf dekh kar,dekh kar guzar gaye.

Nauha - Kaifi Azmi

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