एक अलिफ़ - बुल्ले शाह
इलमन बस करियो यार
एको अलिफ़ तेरे दरकार
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार,
एक शब्द करे तेरा बेड़ा पार,
इल्म न आवे विच शुमार
जांदी उम्र, नहीं ऐतबार
इलमन बस करियो यार
एको अलिफ़ तेरे दरकार
ज्ञान न मिले चाहे पड़ो बार-बार,
कब तक जियोगे नहीं ऐतबार,
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार,
एक शब्द करे तेरा बेड़ा पार।
इलमन बस करियो यार
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार
पढ़-पढ़,लिख-लिख लांदे ढेर,
ढेर किताबें,चार छो फेर
करदे छनन विच उन्हेर
पेछो:"रह?"ते खबर न सतर
पढ़-पढ़ किताबें ढेर लगाया
कुरान,हदीस सब पढ़ आया
रोशनी में भी पर अँधेरा पाया
फिर भी उसको समझ न पाया
इलमन बस करियो यार
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार
पढ़-पढ़ शेख़ मशेख खावें
उलटे मसले घरों बता दें
बे इल्मान नू लुट लुट खावें
झूटे-सच्चे करें इकरार
पढ़ कर मौलाना,शागिर्द बन जाओ
सबको गलत तरीके बताओ
न समझो से तुम पैसा खाओ
करलो चाहे झूठे-सच्चे इकरार
इलमन बस करियो यार
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार
पढ़ पढ़ नफल नमाज़ गुज़ारे
अछीयां बाघा चंगा मारी
मेंबर ते चढ़ वाज़ पुकारें
कीत्ता तीनू इल्म खवार
नमाजें पड़कर तुमने दिन गुज़ारे
छत पर चढ़कर ख़ुदा का नाम भी पुकारे
आसमान तक आवाज़ लगाई
लालच से किया ज्ञान का प्रचार
इलमन बस करियो यार
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार
जब मै सबक इश्क दा पड़िया
दरिया देखे वहादत दा वाडिया
घुमन घेरा दे विच उड़िया
शाह इनायत लाया पार
जिस दिन इश्क का पाठ पड़ा
रहा उसकी नदी में डूबा पड़ा
बेचैन हुआ कुछ समझ न पाया
शाह इनायत ने किया मुझे पार
इलमन बस करियो यार
चाहे जितना ज्ञान लो मेरे यार
एको अलिफ़ तेरे दरकार
एक शब्द करे तेरा बेडा पार
No comments:
Post a Comment