Posts

Showing posts with the label sargam

Tujhe Na Sochun To Kya Karoon.......

तुझे न सोचूं तो क्या करूं ...... तुझे न सोचूं तो क्या करूं, वक़्त के इस खालीपन को कैसे भरूं। सरगम अगर बनाऊं,लफ़्ज़ों से उसे सजाऊं, गीत जो बनता है उसमे तुझे ही गुनगुनाऊँ, फिर उसे न गाऊँ,तो क्या करूं ....... तुझे न सोचूं तो क्या करूं, वक़्त के इस खालीपन को कैसे भरूं। कोरे से कागज़ पे कुछ मिटाऊं,बनाऊं, रंगों में उसे भरूं ,भिगाऊं, तेरा चेहरा ह़ी बन जाता है। रंग फिर न भरूं,तो क्या करूं ....... तुझे न सोचूं तो क्या करूं, वक़्त के इस खालीपन को कैसे भरूं। फूलों को धागों में पिरा,एक माला का रूप दिया, वो तेरी तरह महके तो खुद को कैसे समझाऊं,  उस खुशबू से खुद को कैसे अलग करूं ..... तुझे न सोचूं तो क्या करूं, वक़्त के इस खालीपन को कैसे भरूं। जान अपनी छोड़ कर,याद तेरी छुट जाएगी, गले में फन्दा डाल लिया,सोचा मर जाऊं, पर साथ मेरे तू भी तो है,जान तेरी कैसे लेलूं ....... तुझे न सोचूं तो क्या करूं, वक़्त के इस खालीपन को कैसे भरूं।

Mein Wahin Pe Rah Gaya

मै वहीँ पे रह गया। ज़िन्दगी बढती गई,मै वहीँ  पे रह गया, मै चल भी न सका और समय बह गया। न मेरी राहें कोई,न मंजिल है कोई, धुल फिर भी उड़ती गई,जिसमें मै खो गया। ज़िन्दगी बढती गई,मै वहीँ  पे रह गया। धुप से छाओं से क्या मेरा वास्ता, में बस सुनाता रहा भूली सी दास्तां, किस्से बनते रहे,मै मगर सो गया, मै चल भी न सका और समय बह गया। दर्द से जुड़ गया जो एक रिश्ता नया, छोड़ वो भी गया जब हद से ज़्यादा बड़ गया, सरगमों में मै ही दर्द को चुनता गया, मै चल भी न सका और समय बह गया। ज़िन्दगी बढती गई,मै वहीँ  पे रह गया। "आगे बढता रहूँ",जो करूँ में ये दुआ, जो हुआ ना भूल तू है यही मेरा फलसफा, खुद से लड़ता हुआ मै ही मिटता गया, मै चल भी न सका और समय बह गया। ज़िन्दगी बढती गई,मै वहीँ  पे रह गया। तन्हाई कहे अब तू मुझे छोड़ जा,  तोड़ दे जो बरसों का है नाता ही ये बन गया,  रो पडूँगी मै अगर मुझसा ही तू हो गया, मै चल भी न सका और समय बह गया। ज़िन्दगी बढती गई,मै वहीँ  पे रह गया।