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Shayari #13

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शायरी # 13 Shayari #13 (Couplet) मुस्कुराकर कोई सज़ा दे दो, जीने की वजह पा लेंगे।  - सिफर  Muskurakar Koi Saza De Do, Jeene Ki Wajah Pa Lenge.  - Cifar ########## Just Give A Punishment With A Smile, Will Find A Reason To Live. - Cifar

Tune Saha Jo Dard

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तूने सहा जो दर्द  image from: indiatimes.com तूने सहा जो दर्द वो इन्तेहाँ ही थी, तडपी तू रात भर वो हमारी खता भी थी, तेरे वास्ते जो शोरो-गुल है फ़िक्र है तेरी, हालत की तेरी एक वजह हम में भी कहीं थी। जो अब ये आवाज़े यूँ ही दब गईं, कोशिशें गर सारी यूँ ही व्यर्थ गईं, फिर आइना न देखें वो खादी लिबास में, इज्ज़त जिनकी ख़ाक फिर ता उम्र हो गई। मौत की सज़ा भी बहुत कम है मगर, उन दरिन्दों सी गर हम भी लें डगर, मकसद ये भटक जाएगा फिर इन्साफ का, की महफूज़ रह सकें ज़ीनतें शामो-सहर। आहें तेरी,चीखें तेरी अब सैलाब बन चुकीं, चिंगारियां उठीं थीं जो अब आग बन चुकीं,  न थकेंगे,न रुकेंगे,न थमेंगे हम, फरियादें अब तलक थी जो अब फरमान बन चुकीं।

Tere Diwane

तेरे दीवाने  आज हर गली में, हर मोड़ पर मैख़ाने हैं, अब इस शहर में बढ रहे तेरे दीवाने हैं। थोड़ा परदे का एहतराम करो, इस तरह क़त्ल न सरे आम करो, बे वजह बन रहे जो ये अफसाने हैं, अब इस शहर में बढ रहे तेरे दीवाने हैं। छज्जे पर जुल्फें जो न सुल्झाओगे, हजारों को किसी काम पर लगाओगे, इतने जो टूट रहे अब घराने हैं, अब इस शहर में बढ रहे तेरे दीवाने हैं। ये सुर्ख होंट जब नज़र आ जाते हैं, भंवरे भी बहकने लग जाते हैं, फूलों की जो लगने लगी दुकाने हैं, अब इस शहर में बढ रहे तेरे दीवाने हैं। जो आँखों से तेरी हैं मदहोश हुए, उन्हें साकी जो न रोके तो हैं बेहोश हुए, ख़ाली नहीं हो रहे अब जो पैमाने हैं,  इस शहर में बढ रहे तेरे दीवाने हैं। अब अपने दीवानों पे करदो ये रहम, के किसी एक को बनालो तुम सनम, तड़प-तड़प के जो रोज़ मर रहें हैं, एक बार ही बस सहलेंगे सितम। छोड़ दो फुर्सत में जो तुम्हे अब जाल फेलाने हैं, अब इस शहर में बढ रहे तेरे दीवाने हैं।