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Showing posts from November, 2012

Dil-E-Nadaan(Innocent(naive) Heart)-Mirza Ghalib

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दिल-ए-नादां(Innocent Heart)-Mirza Ghalib
दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है?आखिर इस दर्द की दवा क्या है?
Oh! Innocent heart what has happened to you?
what is the cure of this pain?
हम हैं मुश्ताक और वो बेज़ार,या इलाही यह माजरा क्या है?
I am eager and she unaware,
Oh God! What is happening here?
मै भी मुहँ में ज़बान रखता हूँ,काश पूछो की मुद्दा क्या है?
I too have a tongue in my mouth,
and can tell what is the matter? If asked.
जब की तुझ बिन नहीं कोई मौजूद,फिर ये हंगामा-ए-ख़ुदा क्या है?
If you are the only one present,
than why there is a fuss about God?

ये परी-चेहरा लोग कैसे हैं?गमज़ा-ओ-इशवा-ओ-अदा क्या है?
What these beautiful faces are?
What is all these side glances,airs and coquetry?
शिकन-ए-ज़ुल्फ़-ए-अम्बरी क्यूँ है?निगाह-ए-चश्म-ए-सुरमा सा क्या है? Why these fragrant tresses of hair?
Why these eyes with black liners(surma)?

सब्ज़ा-ओ-गुल कहाँ से आए हैं?अब्र क्या चीज़ है, हवा क्या है?
From where does these plants and flowers come?
What are clouds?What is air?(means who created them)
हमको उनसे वफ़ा…

Ek Nukte Wich Gal Mukdi Ae-Bulle Shah

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एक नुख्ते विच गल मुग्दी ऐ।(At this point,all talks end.)-Bulle Shah
पढ़ नुख्ता छोड़ हिस्बा नूं,                   सब हिसाब छोड एक सबक पड़ो,कर दूर कुफ्र दियां बाबां नूं,                  बातें कुफ्र की सब पीछे छोड़ो,छड़ दोज़ख गोर अज़ाबां नूं,                  नरक के श्राप का डर छोड़ो,कर साफ़ दिलां दियां ख़्वाबां नूं            दिल बस अपना तुम साफ़ करो,
गल ऐसे घर विच ठुक्दी ऐ।              ऐसे घर में ही बात बनती है,एक नुख्ते विच गल मुग्दी ऐ।          इस नुख्ते(बिंदु )पर बहस रूकती है। Learn that point,leave all calculations, leave all of unbeliefs' conversations, leave fear of curse of hell, clear only your hearts' dream well,
At such a house,He only went, At this point,all talks end.
ऐवएं माथा ज़मीन घिसैय दा,        बेकार ही ज़मीन पे माथा घिसते हो,पा लाथा मेहराब दिखई दा,            दिखावे को मेहराब बनाते हो,पढ़ कलमा लोक हसाई दा,             लोगों को कलमा पढके सुनाते हो,दिल अंदर समझ न लाई दा,           उसकी पर समझ न दिल में लाते हो,
कदी सच बात भी लुकदी ऐ।         पर सच्चाई कभी नहीं …

Har Saal Diwali Aati Hai(Diwali Comes Every Year)

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हर साल दिवाली आती है!(Diwali Comes Every Year)

हर साल दिवाली आती है,हर साल दिवाली जाती है,पर तेरे आने की चाह,दिल में ही रह जाती है। Diwali comes every year, Diwali goes every year, but my wish to have you remains in my heart.
जगमग है गलियां भी सारी,खिल गईं है कलियाँ भी सारी,पर तेरे आने की राह,सूनी-सूनी रह जाती है। Streets are shining with lights, Buds are blooming with pride But the way through which you come always remain vacant.
आतिशबाज़ी का ये मंज़र,चुबता है जैसे खंजर,खुलती भी हैं जो ये बाहें,खुद में ही सिमट फिर जाती हैं। The sight of firecrackers, Pinch me like daggers, If I open my arms for you, Confines again in self.
हर साल दिवाली आती है,हर साल दिवाली जाती है। Diwali comes every year, Diwali goes every year,

Dhire-Dhire(Gradually)

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धीरे-धीरे (Gradually)- A tribute to Malala Yusufzai.10 नवंबर को संयुक्त राष्ट्र ने मलाला युसुफजई दिन घोषित किया है।उसके संघर्ष को समर्पित है ये कविता।10 NOV. is announced as a Malala Yususfzai day by U.N. This poem is dedicated to her struggle.
धीरे-धीरे सपनो को अब बड़ने दो,हौले-हौले उम्मीदों को अब उड़ने दो,सहमे-सहमे रहकर अब तक जिए,अब आगे आकर कुछ कहने दो। Let's dreams grow gradually, let's expectations fly slowly, we have lived a life of fear until now, Let us come forward and say something fearlessly.
ऐसे जागे हैं अब न सोएंगे,यूँ ही घुट-घुट कर अब न रोएंगे,बड़ी-बड़ी बंदूकों का अब डर नहीं,उन्हें हम पर अब चाहे ख़ाली होने दो,धीरे-धीरे .................................... We are awake now,not to sleep, why to hide and slowly weep, we are not afraid of big guns, let them empty on us hurriedly. let's................................
एक-एक कर के हैं अब एक बने,अपने इरादों पर हैं आज ठने,अब थकने का है सवाल नहीं,इन होसलों को अब न खोने दो।धीरे-धीरे .................................... We…

Moko Kahan Dhunde Re Bande(Where Do You Search Me)

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मोको कहाँ ढूंढे रे बन्दे?(Where Do You Search Me)- Kabir
मोको कहाँ ढूंढे रे बन्दे                                                                                               
मै तो तेरे पास  में 

Where do you search me?
I am with you


ना तीरथ में ना मूरत में 
ना एकांत निवास में
ना मंदिर में ना मस्जिद में 
ना काबे कैलास में 
मै तो तेरे पास में बन्दे 
मै तो तेरे पास में 

Not in pilgrimage,nor in icons
Neither in solitude resides
Not in temples,nor in mosques
Neither in Kaba nor in Kailas
I am with you o man
I am with you


ना में जप में ना में तप में 
ना में बरत उपास में 
ना में क्रिया करम में रहता 
नहिं जोग संन्यास में 
ना ब्रह्माण्ड आकाश में 
ना में प्रकृति प्रवार गुफा में 
नहिं स्वांसो की स्वांस में 

Not in prayers,nor in meditation
Neither in fasting or prohibition
Not in vedic procedure
Nor in yogic postures
Not even in sky or universe
Neither in womb of nature
Not in the breath of the breaths


खोजि होए तुरत मिल जाऊं 
इक पल की तालास में 
कहत कबीर सुनो भई साधो 
मै तो हूँ विश्वास में . 
If you are a true…

Zeehal-e- miskin Makun Taghaful- by Amir Khusrow

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ज़िहाल-ऐ-मिस्कीं मकुन तगाफुल - अमीर खुसरो SJD4REMPJMVM (Do not overlook my misery- Amir Khusrow) The poem is unique in a way that it is written in Persian and Brij Bhasha. In the first verse,the first line is in Persian,the second in Brij Bhasha,the third in Persian again and the fourth in Brij Bhasha. In the remaining verses,the first two lines are in Persian,the last two in Brij Bhasha. The poem showcases Amir Khusrow's mastery over both languages. In this poem,he potrays the longing of a lover for her beloved,her restlessness and how she feels without him.

ज़िहाल-ऐ-मिस्कीं मकुन तगाफुल
दुराये नैना बनाए बतियाँ कि ताब-ए-हिजरां नदाराम-ऐ-जान न लेहो काहे लगाये छातियाँ। You don't understand my misery, by blandishing your eyes and weaving tales. my sweetheart,I don't have patience now why don't you take me to your bosom.
शबां-ए-हिजरां दरज़-चूं-ज़ुल्फ़ वा रोज़-ए-वस्लत चो-उम्र-कोताह,सखि पिया को जो मै न देखूं तो कैसे काटूं अंधेरी रतियां। The night of separation are long like tre…